ख़ाली नहीं रहा कभी आँखों का ये मकान, 

सब अश्क़ बाहर गये तो उदासी ठहर गयी।

ये राहें ले जायेंगी मंज़िल तक.... हौसला रख ए मुसाफ़िर.... कभी सुना है क्या.... अंधेरे ने सवेरा होने ना दिया.....